कई औषधि गुणों से भरपूर धनिया (coriander)- धनिया के फायदे

प्रकृति की सुगंधित अनमोल देन धनिया यह सर्वसुलभ एवं सस्ता तथा समाज के सभी वर्गों के लिए प्रिय है, धनिया का प्रयोग भोज्य पदार्थों को सुन्दर या रूचिकर बनाने के लिए बहुलता से प्रयोग किया जा रहा है । सामान्यत धनिया की पत्ती की चटनी खाने का भी चलन बहुत है । धनिया का बीज (दाना) सब्जियों में सुगंध बढाने के लिए प्रयोग होता हैं । यह सामान्य जनमानस को धारणा है कि यह सिर्फ एक सुगन्धित रसोई घर का मसाला हैं जबकि इसमें बहुत सारे पौष्टिक त्तत्व एवं औषधि गुण मौजूद हैं ।

उत्पत्ति स्थान

इसको खेती समस्त भारत मैं होती है । अथिकांशात्त: प्रत्येक मानव इसके रूप-म्बरूप से परिचित है ।

रासायनिक संगठन

100 ग्राम हरी धनिया मै-

  • प्रोटीन – 11.2
  • वसा – 16.1
  • खनिज पदार्थ – 4.4
  • लौह … 17.9 मिली ग्राम
  • फॉस्फोरस  – 0.37
  • कैल्सियम … 0.63
  • सूत्र – 32.6
  • कार्बोहैड्रेट 21.6
  • फलो की आद्रर्ता – 11.2




इसमें एक सुगंधित तेल 0.5% होता है तेल का प्रमुख घटक कोरीएणडोल है। जो 45 सै 70 % होता है। इसके अलावा एक स्थिर तेल 19 से 20%  तक होता हैं । धनिया की स्वाद प्रियता एवं गंध का प्रमुख कारण गंधित तेल ही हैं ।

कर्म यह त्रिदोष हर है । स्निग्ध होने से वात को कषाय रिक्त , मधुर होने से पित्त तथा रिक्त , कटु और ऊष्ण होने से कफ का शमन करता हैं।

विशेष- यह कषाय होने से शुक्र धातु को क्षीण करता है । अत: पुरुष इसका सेवन २४ ग्राम से ज्यादा न करें नियमित रूप से ।

धनिया का चिकित्सकिय प्रयोग-

सिरदर्द में : हरी धनिया की पत्ती पीसकर सिर पर मोटा लेप लगाने से सिर दर्द में लाभ मिलता है ।

गंजे होने पे : हरा  धनिया पत्ती पीसकर बालो में गाढ़ा लेप आधे घण्टे तक लगाकर रखने से बाल झड़ना कम हो जाते हैं ।

गर्भावस्थागत वामन में – धनिए पत्ती का रस चावल के पानी में मिलकर गर्भवती स्त्री को पिलाने से उल्टिया कम होती है ।

अमल पित्त  में: एक चम्मच धनिया के बीज को एक गिलास पानी में रात्रि में भिगो दें प्रातः मसलकर छानकर  खाली पेट पिने ये अमल पित्त में लाभ मिलता है।

मंदागिन में : धनिया दाना, सोंठ एवं सौंफ बराबर मात्रा में लेकर काढ़ा बना ले , मंदागिन ग्रस्त व्यक्ति को सेवन करने से लाभ होता है ।

मधुमक्खी  या बर्रे  के डांक में: हरी धनिया पत्ती को पीसकर उसमे २-३ बूँद सिरका  मिलकर दंशित स्थान पर कुछ देर तक लगाए रखने से शीघ्र ही दर्द एवं जलन दूर होती  है ।

दाह में -धनिया का चूर्ण ६ माशा, मिश्री ६ माशा मिलाकर ठन्डे पानी के साथ दिन में ३ बार सेवन करने से दाह व पीटकर में आराम मिलता है ।



उलटी में – धनियापत्ति के पत्तो का रस थोड़ी – थोड़ी देर बाद १-१ बड़ा चम्मच पिने से उलटी में कमी होती है और आराम मिलता है ।

मूत्र रोग में – धनिया १०० ग्राम जौ कूट कर १ पाव पानी में रात को भिगो दे सुबह मसलकर छान ले उसमे २ टोला मिश्री मिलाये । दिन में तीन बार में से मूत्र रोग में लाभ मिलता है ।

छींक– हरी धनिया के पत्तियों को रगड़कर सूंघने से छींक आनी बंद हो जाती है ।

बवासीर – धनिया २ टोला , रात में १ पाव पानी में फुलाए सुबह मसल दे एवं २ टोला मिश्री मिलाकर ,सुबह शाम  सेवन करने से बवासीर (गुदा से खून आना ) रोग ठीक हो जाता है ।

नकसीर – ताज़ा धनिया की पत्तियों का रस नाम से सूंघने से एवं पत्तियों को पीसकर सर पर लेप करने से नाक से खून आना बंद हो जाता है ।

चक्कर – सूखा धनिया एवं सूखा आँवला को १०-१० ग्राम की मात्रा में लेकर जौ कूट कर रात में पानी से भिगो दे , सुबह इसे अच्छी तरह मसलकर छान ले एवं थोड़ी से मिश्री मिला ले और पानी से ले, चक्कर आना बंद हो जयेगा  ।




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