“पौष्टिक ओर रक्तवर्धक चुकंदर ” चुकंदर के फायदे

शीत ऋतु में बहुत से फलों की उत्पत्ति होती है । शीत ऋतु में फलों का सेवन करके छोटे- बड़े सभी शारीरिक शक्ति विकसित कर सकते हैं औऱ मौसमी रोग-विकारों से सुरक्षित रह सकते है ।चुकन्दर एक ऐसी वनस्पति है जो सभी मौसमों में मिल जाती है लेकिन शीत ऋतु में बहुत जायदा होती है । अधिकतर लोग चुकंदर का सेवन सलाद के रूप में करते है ।चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार चुकन्दर रक्तवर्धक होता है । प्रतिदिन चुकंदर का रस पीने से शरीर में रक्त की वृद्धि होती है और एनीमिया रोग से मुक्ति मिलती है । अभी हाल में चुकंदर पर किए सर्वेक्षण से ज्ञात हुआ है कि चुकंदर का रस उच्च रक्तचाप के प्रकोप को कम करता हैं। प्रतिदिन एक कप चुकंदर का रस पीने से सात प्रतिशत तक उच्च रक्तचाप में कमी होती है । चुकंदर में नायट्रैट की अधिक मात्रा होती है जो उच्च रक्तचाप को कम करती है । चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार चुकंदर मधुमेंह रोग में बहुत लाभ पहुंचाता है। चुकंदर का रस पीने से शारीरिक थकावट ख़तम होती है ।

चुकंदर में गुणकारी रासायनिक त्तत्व

चिकित्सा विशेषज्ञों कै अनुसार चुकंदर रक्तवर्धक , पौष्टिक कंदमूल होता है। चुकंदर में शर्करा की 10 प्रतिशत मात्रा पाई जाती है। चुकंदर में पाए जाने वाला ‘बेटिन ‘ त्तत्व आंतो को बहुत लाभ पहुंचात्ता है । चुकंदर में 83 . 8 प्रतिशत जल होता हे। आहार के गुणकारी त्तत्व वसा प्रोटीन और काबौहाहड्रेट भी पाए जाते हैं । चुकंदर में वसा 0.1 %, प्रोटीन 1.7%, कार्बोहाइडरेट 13.6%, कैल्शियम 0.20%, और फ़ास्फ़रोस 0.06% होता है। चुकंदर में लौह त्तत्व (आयरन) 1 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम होती है। चुकन्दर में अनेक विटामिन पाए जाते हैँ। विटामिन ‘ए’ बहुत कम मात्रा में होता है जबकी विटामिन ‘बी’ 90 माइक्रोग्राम और विटामिन “सी” है 88 मिलीग्राम प्रति 300 गाम होता है । चुकंदर में निकोटिन अमल 0 .4 मिलीग्राम मात्रा में होता है । कैल्सियम और फ़ास्फ़रोस के कारण चुकंदर मस्तिष्क और अस्थियों को बहुत लाभ पहुंचाता है ।



चुकंदर के रस का गहरा लाल रंग लोह त्तत्व की अधिकता के  कारण होता  हैं । विशेषज्ञों कै अनुसार गहरा  लाल रंग बीटासायनिन के कारण होता हैं। एंटीऑक्सीडेंट की अधिकता के कारण चुकंदर की स्वास्थ्य के लिए गुणकारी मानते  है । यहीं नहीं उदर में पाए जाने वाले  फोलिक अमल पोटेशियम व फाइबर भी शरीर को बहुत लाभ पहुचते हैं ।

चुकंदर की पाचनक्रिया सरलता से नहीं होती है इसलिए अनार गाजर, संतरे, मौसमी के रास के साथ चुकंदर का रस मिलाकर सेवन किया जाता है  दो चुकंदर का प्रतिदिन सेवन करने से प्लेटलेटूस के नष्ट होने की क्रिया कम होती है और रक्त की बृद्धि होती है ।

चुकंदर के साथ उसकी हरी पत्तिर्यों का सेवन करने से बहुत लाभ होता है। हरी पतियों में भरपूर मात्रा में लौह त्तत्व होता है । अतियों में विटामिन है ए’ भी पर्याप्त मात्रा म होता है जबकि चुकंदर (कंद) में बहुत कम विटामिन ‘ए’ होता है । गाजर के रस के साथ मिलाकर चुकंदर का रस सेवन करने से पित्ताशय व वृक्कों को हानि पहुचने वाले हानिकारक तत्व नष्ट होते हैं । चुकंदर का रस पीने से यकृत को शक्ति मिलती है। चुकंदर का रस नेत्रों की थकावट को दूर करता है। चुकन्दर के क्षार त्तत्व शरीर में एसोडोसिस को रोकने में सहायता करते हैं ।

आधुनिक वैज्ञानिकों द्वारा चुकंदर पर परीक्षण करने पर ज्ञात हुआ कि रस में पाए जाने वाले अमीनो अम्ल में केंसर रोधी त्तत्व भी होते हैं। चुकंदर का रस प्रतिदिन सेवन करने से कब्जा की विकृति नहीं होती क्योंकि चुकंदर में फाइबर की अधिक मात्रा होती हैं जो आंतो में मल को जमने नहीं देती है ।



चुकंदर के औषधीय उपयोग-

  • चुकंदर का रस सेवन करने से पाचनक्रिया तीव्र होती है।
  • चुकंदर और गाजर का रस मिलाकर प्रतिदिन पीने से शरीर में रक्त की वृद्धि होती हैं । शारीरिक सौंदर्य बढता है ।
  • चुकंदर का रस पीने व चुकंदर का सलाद खाने से बदरंग नाखूनों का सौंदर्य तेजी से बढ़ता है ।
  • चुकंदर के पतों को कूटकर, उनका रस निकाल कर उस रस में मधु मिलाकर दाद पर लगाने से दाद शीघ्र नष्ट होता है।
  • चुकंदर का रस पीने से पाचनक्रिया  सन्तुलित होती है। कन्ज नष्ट होती है तो अर्श रोग (बवासीर ) का निवारण होता है ।
  • चुकंदर में पाए जाने बाला ‘बेटीन ‘ तत्व शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करके द्रुयूमर और कैंसर से सुरक्षित रखता है ।
  • गर्भावस्था में पौष्टिक आहार के अभाव में गर्भवती में रक्त की बहुत कमी हो जाती है । ऐसी स्थिति में चुकंदर के रस में गाजर का  रस मिलकर पिलाने से रक्त की बृद्धि होतीहै। चुकंदर  के रस के साथ सेब या टमाटर का रस मिलाकर भी पिलाने से बहुत लाभ होता है ।
  • चुकंदर का रस निकाल कर उसमें हल्दी मिलाकर सिर के बालों की जडों में लगाने से बाल उगने लगते है । बाल टूटने भी बंद होते हैं ।
  • प्रतिदिन चुकंदर का सलाद खाने व रस पीने से फेफडों में एक्रत्र कफ सरलता से निकल जाता है ।
  • चुकंदर का 100 ग्राम रस में गाजर का 100 ग्राम  मिलाकर कुछ दिनो तक निरन्तर पीने से ऋतुम्रात्र के अनेक विकृतिया नष्ट होती हैं। ऋतुस्राव समय पर होता हैं ।
  • चुकंदर के रस में जल मिलाकर पीने से पथरी की विकृति नष्ट होती है । चुकंदर का सूप भी रोगी को बहुत लाभ करता है ।
  • चुकंदर का रस पीने से वृवकों को शक्ति मिलती है। गुदों की क्रिया तीव्र होती है। और मूत्र अधिक आता  है ।




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