कई रोगो का रामबाण इलाज है – अमृतधारा

अमृतधारा

आयुर्वेद की बहुत ही प्राचीन औषधि है अमृतधारा जो की कई वर्षो से इस्तमाल की जा रहीं है ।इससे आसानी से घर में तैयार किया जा सकता है और ये बहुत से रोगो में उपयोग होने वाली औषधि है अमृतधारा का उपयोग भी बहुत सरल है यह एक बहुत ही प्रभावशाली आयुर्वेद औषधि है जो की बहुत से परेशानियों में काम आती है। आज मार्किट में बहुत सी कंपनी अमृतधारा बना के बेच रही है वो भी बहुत महंगे दाम पर । आज हम आपको बताने जा रहे हैं अमृत धारा घर पर कैसे बनाये और ये किन किन बीमारियो में उपयोग में लायी जा सकती हैं। ये बहुत ही आसान सरल और उपयोगी हैं। यह अनेक रोगो की परमऔषिधि है।अमृत धारा की उपयोगिता एवं फायदा अवर्णीय है आप अमृत धारा को अपने फर्स्टऐड किट में भी शामिल कर सकते है जिससे आप हर समय अमृत धरा का उपयोग कर सकते हैं


अमृत धारा बनाने की सामग्री:-

pepermint satva

 

पिपरमेंट – 10 ग्राम (पुदीना सत अपाचन , पेटदर्द व मरोड़ आदि से तुरन्त आराम दिलाता हैं।)

 

 

 

 

कपूर भीमसैनी – 10 ग्राम (कपूर सत पेट में जलन ,एसिडिटी के लिए लाभदायक होता है।)

 

अजवायन (थाईमोल) – 10 ग्राम (अजवाईन सत गैस , पाचन व पेट से सम्बन्धित परेशानियों के लिए बहुत फायदेमंद होता हैं।)

 

तीनों सामान को मिलकर काँच की शीशा में बंद कर के रख दें | जब तीनों मिलकर (पानी) बन जाये तब अमृतधारा तैयार है धयान रखे की कांच की बोतल अच्छी तरह से बंद हो ।(ये सभी वस्तुएं ठोस अवस्था में मिलती है। इन्हे मिलाने पर ये तीनो द्रव अवस्था में बदल जाती हैं।)



अमृतधारा के उपयोग-

  • सिरदर्द होने पर 2 बूँद सिर, माथे और कान के आस पास मालिश करे ।
  • दाँत दर्द होने पर रूई में भिगोकर दाँत की बिच दबाने से आराम मिलता है ।
  • पेट दर्द होने पर 5 बूँद आधे गिलास पानी में डालकर पिने से आराम मिलता है ।
  • बदहजमी, दस्त, उल्टी में 3-4 बूँद आधे गिलास पानी में डालकर पिने से आराम मिलता है ।
  • छाती का दर्द मीठे (तिल) तेल में अमृतधारा मिलाकर मालिश करने से आराम मिलता है ।
  • जुकाम होने पर इससे सूँघने पर साँस खुलकर आता है तथा जुकाम ठीक हो जाता है ।
  • छालों होने पर पर थोड़े पानी में 1-2 बूँद डालकर लगाने से लाभ होता है।
  • भोजन के बाद दोनों समय 2-3 बूँद अमृतधारा ठंडे पानी में मिलाकर पीने से मन्दाग्नि, अजीर्ण, बादी, बदहजमी एवं गैस ठीक हो जाती है ।
  • हिचकी आने पर 1-2 बूँद अमृतधारा जीभ में रखकर मुँह बंद करके सूँघने से २-4 मिनट में ही आराम मिलता है ।
  • बिच्छू, ततैया, भौरा या मधुमक्खी के काटने के स्थान पर अमृतधारा मलने से आराम मिलता है
  • श्वास, खाँसी, दमा और क्षय-रोग में 4-5 बूँद अमृतधारा ठंडे पानी में मिलाकर सेवन करें आराम मिले गा।।
  • खुजली होने पर 10 ग्राम नीम के तेल में 5 बूँद अमृतधारा मिलाकर मालिश करने से हर तरह की खुजली में आराम मिलता है ।
  • दिल के रोग में आँवले के मुरब्बे में 3-4 बूँद डालकर खाने से आराम मिलता है ।

अमृतधारा कब नहीं लें  अमृतधारा एक आर्युवेदिक दवाई है अतः इसके कोई नुकसान नहीं हैं , फिर भी कुछ परिस्थियों में इन्हें नहीं लेना चाहिए।

  • नवजात शिशु व एक साल से छोटे बच्चों को नहीं देना चाहिए।
  • किसी भी सर्जरी के तुरत पहले या बाद चिकित्सक परामर्श के बिना नहीं देना चाहिए।
  • आँख , नाक या कान में नहीं डालना चाहिए।




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