संतरे के है फायदे अनेक, लंबी उम्र के लिए खाये संतरे

संतरे के है फायदे अनेक

संतरे और गाजर जैसे फल सेहत की दृष्टि से बहुत ही फायदेमंद होते हैं, क्योंकि इनमें अल्फा-कैरोटिन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है । ज्ञात हो कि अल्फा-कैरोटिन एक एंटी- ऑक्सीडेंट है, जो संतरे और गाजर सरीखे फलो में अधिक मात्रा में पाया जाता है।

अमेरिका में हुए एक हालिया शोध के मुताबिक, जिन व्यक्तियों के रक्त में अल्फा/कैरोटिन का स्तर ज्यादा होता है, वे तुलनात्मक रूप से लंबे समय तक जीतेहैँ। साथ ही सामान्य लोगों की तुलना मेंकेंसर और हदय रोगों के कारणउनकी मृत्यु भी कम ही मामलों में देखी जाती है।

यह शोध अमेरिका में सैंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन की ओर सेकिया गया । इस शोध के दोरान लगभग 15000 वयस्को को शामिल कर उनके ब्लड सैंपल्स में मौजूद अल्फा कैरोटिन के स्तर की जाँच की गयी, जिससे पता चला कि जिन व्यक्तियों के ब्लड में अल्फा-कैरोटिन का स्तर ज्यादा होता है वे लंबे समय तक जीते हैं ।

ऑस्ट्रेलिया में हुए एक शोध के अनुसार, प्रतिदिन एक सँत्तरे का सेवन कई प्रकार के केंसर की संभावनाओं को कम कर सकता है । ऑस्ट्रेलिया के द काँमन वेल्थ साइंटिफिक एण्ड इंडस्ट्रियल रिसर्च आर्गनाइजेशन ने अपने एक शोध में पाया है कि संतरे जैसे रसीले फलों के सेवन से मुख (मुँह) एवं पेट के कैंसर की संभावना कम होती है। यही नहीं, इनका सेवन पक्षाघात की संभावना को भी कम करता है। इन फली में पाये जाने वाले एंटी-ऑक्सीडेंट ही इसके कारण है। साथ ही संतरे जैसे रसदार फल प्रतिरोधक क्षमता को भी बढाते है जिससे ट्यूमर होने से सुरक्षा मिलती है ।

इटालियन विशेषज्ञों का मानना है कि एक संतरा रोज खाने से अस्थमा रोग सेग्रसित बच्चे को सांस लेने में तकलीफ नहीं होती । इन विशेषज्ञों के अनुसार जो बच्चे त्ताजे रसदार खदृटे फलों का अधिक सेवन करते हैं उन्हें सांस और खाँसी की समस्या भी कम ही होती है । वैसे भी संतरे सरीखे रसदार खट्रटे फल विटामिन-भी का अच्छा स्रोत होता है और अच्छे स्वास्थ्य के लिए विटामिन- सी बहुत आवश्यक है।

शीतलता प्रदान करने वाले फलों में संतरे का अपना ही स्थान है । यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ विटामिन-सी प्राप्ति का अच्छा स्रोत है। इसमें मुख्य रूप से विटामिन-सी ही रहता है । कूछ अनुसंधान कर्ताओं के अनुसार सभी विटामिनों में विटामिन- सी अव्वल होता है । विटामिन-सी वह अति आवश्यक विटामिन है जो हमें संक्रमण से बचाता है एवं रोग प्रतिरोधी शक्ति देता है ।




संतरे का रस बचाता है हदय रोग से

यदि आप प्रतिदिन 2 गिलास संतरे का रस पीते है तो आपके उच्च रक्तचाप में कमी आ सकती है और इससे ह्रदयरोग की आशंका भी कम हो जाती है; एक नए अध्ययन में यह दावा किया गया है । विश्व स्वास्थ्य सख्या का अनुमान है कि ह्रदयाघात के लगभग 50% मामले उच्च रक्तचाप के कारण ही होते हैं ।

फ्रांस के आउवर्गने विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं ने अपने एक शोघ अध्ययन में पाया है कि अधेड़ उम के

जिन लोगो ने लगातार एक महीने तक आधा लीटर संतरे का रस पीया उनके रक्तचाप में कमी देखी गईं । इस फ्रांसिस अध्ययन में पाया गया कि संतरे में पाया जाने वाला हेस्परेडिन  है रसायन हदय रोग से रक्षा करता है ।

अमेरिकन जर्नल आंफ क्लीनिकल न्यूट्रीरान’ में प्रकाशित इस फ्रांसीसी शोधकर्ताओं की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस अध्ययन का मुख्य परिणाम यह रहा कि चार सप्ताह तक संतरे का रस पीने वाले व्यक्तियों के रक्तचाप में महत्वपूर्ण कमी देखो राई । उच्च रक्तचाप में सिर्फ तीन से चार अंकों की कमी हदय रोग की संभावना की 20% कम कर देती है। हालांकि इस शोध में उन मरीजों के लिए चिकित्सकीय सलाह लेने की बात भी कही गई है जो उच्च रक्तचाप की दवा ले रहे हैं ।

ब्रिटेन में हुए एक नए अध्ययन के मुताबिक संतरा और अंगूर का नियमित सेवन ह्रदय रोग से मुक्ति दिलाता है। इन दोनों फलो में कुछ ऐसे रासायनिक तत्व पाए जाते है जो धमनियों और दिल को स्वस्थ रखते हैं। ऐसे में हृदयाघात का खतरा टल जाता है। इस अध्ययन के मुताबिक रोजाना कम से कम एक संतरा खाकर ह्रदयाघात के खतरे को टाला जा सकता हैं ।दरअसल, खदृटे-मीढे फलों में फ्लेवानोन नामक रसायनिक तत्व पाया जाता है जो शरीर में केलेस्ट्रॉल की मात्रा में 20 से 25 फीसदी की कमी ला सकता है । साथ ही यह बैड केलेस्ट्रॉल के ऑक्सीडेशन को भी कम करता हैं । शोधकर्ताओं का मानना है कि लोग उच्च केलेस्ट्रॉल की चपेट में आने के बाद संतरे जैसे खटूटे फलों का सेवन कर दवा खाने की बाध्यता टाल सकते हैं ।

संतरा खाइये और पेप्टिक अल्सर दूर भगाइये

संतरा खाइये और अल्सर को दूर  भगाइये । हाँ, इस गुप में आप चाहें तो नीबू अमरूद और टमाटर को शामिल कर लें । जी हाँएक नये अनुसंधान बता रहे हैं कि रक्त में विटामिन- सी का बढ़। हुआ स्तर पेप्टिक अल्सर को रोकने में सहायक होता है क्योंकि यह विटामिन-एच पाइलोरी नामक बैक्टीरिया की वृद्धि को रोकता है, जिसकी मौजूदगी पेप्टिक अल्सर के लिए जिम्मेदार होती है ।

संतरा में विटामिन-सी, अधिक होने के कारण यह बच्चे के दांतो के लिए भी विशेष लाभदायक होता है । इसमें घुलनशील फाइबर होने के कारण पेट का अम्लीपन व कब्जा जैसे रोगियों के लिए यह उत्तम आहार है हैं लेकिन इसके अत्यधिक सेवन से कफ में वृद्धि भी हो सकती है।


संतरे के विशेष गुण

संतरा का एक बडा गुण उसमें बीटा- कैरोटिन नामक ऑक्सीकारक रोधी (एटी-ऑक्सीडेंट) रसायन का होना भी है, जो केंसर के खतरे को कम करता है तथा प्रतिरोधकता की क्षमता को भी बढाता है बीटा-कैरोटिन में लाल, पीले और काले रंग के पिग्मेंट होते हैं जो शरीर में जाकर विटामिन- ए का निर्माण करते हैं ।

संतरे का रसायनिक विश्लेक्षण

रसायनिक विश्लेषणकर्ताओ ने संतरे में मोजूद त्तत्वों को इस प्रकार वर्गीकृत किया है-

  • जल                       80.5%
  • प्रोटीन                     9.0%
  • वसा                        0.3%
  • कार्वोहाइड्रैटूस        10.6%
  • कैल्सियम               0.05%

संतरे में विटामिन- ए ,बी, इ फोलिक अम्ल, लोहा तथा गंधक के कई गुण भी मौजूद होते हैं। इसके अतिरिक्त संतरे में शर्करा भी पर्याप्त मात्रा में पाई जाती है जो सुपाच्य और तत्काल शक्ति देने वाली होती है। इसीलिए दुर्बल रोगियों को तत्काल शक्ति पहुँचाने के लिए डॉक्टर संतरे का रस पिलाने की हिदायत देते है ।

संतरे का औषधि रूप में प्रयोग

मधुमेह : 200 ग्राम संतरे का नाश्ता  रोजाना प्रातः काल करने से मधुमेह में त्ताभ होता हैं । मधुमेह में इससे अधिक संतरे का रस न ले ।

हृदय की दुर्बलता: संतरा हृदय तथा यकृत के लिए अत्यन्त लाभदायक होता है । हृदय रोगियों को एक गिलास संतरे के रस में एक चम्मच शहद मिलाकर रोजाना देने से त्ताभ होता हे।

यदि हृदयरोगी रोज 20 ग्राम शहद में 150 ग्राम संतरे का रस मिलाकर दिन में 2 बार सेवन करे तो आश्चर्यजनक लाभ होगा ।

निर्बलता, मंदागीन और उदरशूल  संतरे के छिलके के नियमित सेवन से पेट की बिगड़ी हुई क्रिया सुधरती है तथा उदरशूल, मंदागीन और निर्बलता मिटती है।

कब्ज़: संतरा कब्ज़ और कब्ज़ से उत्पन्न रोगों में विशेष गुणकारी होता है । इसके 2 फल रोजाना खाने से कब्ज़ दूर होती है ।

पित्तदाह  संतरे का अर्क, इलायची और मिश्री का चूर्ण समभाग रोज 2 बार सेवन करने से पित्तदाह में लाभ होता है ।

संधिवात : संतरे की बड़ी फांको को छाया में सुखाकर कूट ले तथा छानकर इस चूर्ण को मैग्नीशिया शक्कर के शीरे के साथ सेवन करे, संधिवात से मुक्ति मिलेगी

पसली का दर्द संतरे की बड़ी फांको को छाया में सुखाकर कूट ले तथा छानकर पानी के साथ सेवन करें । इसके दो-तीन बार के सेवन से ही पसली के दर्द से आपको मुक्ति मिल जाएगी ।

नेत्र रोग : शीतकाल में संतरे का रस एक गिलास लेकर उसमें एक चम्मच शहद घोलकर रोजाना पीने से नेत्र-ज्योति बढती है।

संतरे का रस और शुद्ध शहद समान मात्रा में मिलाकर शीशी में भर ले । इसे रोजाना सुबह- शाम दो-दो बून्द अपनी आँखों में डालें । इससे नेत्र रोगदूर होगा, साथ ही आपकी आँखों की रोशनी भी बढेगी ।

सुंदर संतान हेतु : गर्भवती महिलाओ को गर्भावस्था में रोज संतरे का रस पीने से संतान सुंदर होती हैं 1 गर्भवती स्त्री को प्रतिदिन 300 मिलीलीटर संतरे का रस रोजाना नियमित सेवन करना चाहिए । इसके प्रयोग से गर्भवती महिलाएँ स्वस्थ भी रहती है ।

जनम के 4-5 माह बाद ही शिशु रोग विशेषज्ञ से सलहा लेकर बच्चे को भी रोजाना 2 चम्मच संतरे का रस देना चाहिए । इससे शिशु की बल एवं बुद्धि  में वृद्धि होती है और उसकी पाचन क्रिया भी हमेशा सुचारु बनी रहती है।

बवासीर  पिले संतरे के छिलके को सुखा लें और बारीक पीसकर इसमे समभाग देशी खांड मिलाकर एक-एक चम्मच की मात्रा में रोज तीन बार पानी के साथ लें । इसकी कुछ खुराक लेने के बाद ही आपको अहसास होगा कि बवासीर आपका धीरे – धीरे कम हो रहा है । इसके सेवन काल में मिर्च मसाले गर्म और वादी करने वाली चीजों का सेवन ना करे ।

रोज सीमित मात्रा में संतरे के सेवन से विभिन्न प्रकार की बीमारियों से लड़ने की प्रतिरोधक शक्तिया शरीर में बनी रहती हैं। इसके साथ-साथ यह विभिन्न संक्रामक रोगों से भी बचाता है । अत्; विटामिन-सी से भरपूर संतरे को अपने आहार में रोजाना शामिल करें ।

आप संतरा चाहे रोज खाएँ, पर उसकी मात्रा सीमित हो । जरूरत से ज्यादा संतरे का रस भी न पीएँ, यह सोचकर कि यह विटामिन है नुकसान नहीं करेगा । सीमा से अधिक संतरे का रस लेना नुकसानदेह होता है।




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