“आर्थराइटिस” गठिया रोग का रामबाण इलाज॥ 10 दिनों में दिखने लगेगा असर॥

“आर्थराइटिस” को हिंदी में गठिया कहते हैं जब हड्डियों के जोडो़ में यूरिक एसिड अधिक मात्रा बढ़ जाती है तो वह गठिया का रूप ले लेता है। यूरिक एसिड कई तरह के आहारों को खाने से बनता है। रोगी के एक या कई जोड़ों में दर्द, अकड़न या सूजन आ जाती है। इस रोग में जोड़ों में गांठें बन जाती हैं और शूल चुभने जैसी पीड़ा होती है, इसलिए इस रोग को गठिया कहते हैं। गठिया रोग से सबसे ज्यादा परेशानी हमारे हड्डी के जोड़ों में होती है।

 

 

“आर्थराइटिस” के प्रकार :- यह मुख्यत तीन प्रकार का होता है वैसे तो यह कई प्रकार का होता है लेकिन ये तीन प्रकार मुख्य हैं

  • ऑस्टिओआर्थरिटिस जिसे हिंदी में अस्थिसंधिशोथ के नाम से जाना जाता है।
  • रहूमटॉइड आर्थराइटिस इसे हिंदी में आमवातिक संधिशोथ या रुमेटी संधिशोथ के नाम से जाना जाता है।
  • पसरीअतिक आर्थराइटिस  इसे हिंदी में सोरियासिस  कहते हैं।

आर्थराइटिस (गठिया) के लक्षण :-जब व्यक्ति को गठिया रोग हो जाता है तो ये सब लक्षण समाने उभर के आते हैं जैसे

  1. रोगी के जोड़ों में लचीलेपन में कमी होती है।
  2. रोगी का वजन घटता जाता है।
  3. शरीर में बहुत ज्यादा थकान रहती है।
  4. चलने पर संधि शोथ वाले जोड़ों की आवाज आना इसका एक प्रमुख लक्षण है।
  5. चलने फिरने में जोड़ों में दर्द होना, एक जगह काफी देर बैठने के बाद उठने में जोड़ों मैं बहुत दर्द होता है।
  6. जब रोगी के शरीर के जोड़ों को कोई छूता है तो रोगी को बहुत पीड़ा होती है।
  7. प्रभावित जोड़ के ऊपर त्वचा में गर्माहट और लालिमा का होना।
  8. कभी-कभी जोड़ो पर सूजन, जकड़न और दर्द होता है ये तब होता है जब जोड़ों में यूरिक एसिड जमा हो जाता है इत्यादि।





आर्थराइटिस (गठिया) के कारण :- वैसे तो गठिया रोग जोड़ों में यूरिक एसिड अधिक मात्रा में जमा होने के कारण होता है लेकिन कुछ कारण ऐसे भी होते हैं जिनकी वजह से जोड़ों में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ जाता है वो कारण कुछ इस प्रकार हैं-

  1.  बैक्टीरियल अथवा वायरल से फैलने वाले रोग के कारण आर्थराइटिस रोग हो जाता है।
  2.  अनुवांशिक के कारण भी आर्थराइटिस हो जाता है।
  3.  शरीर में अत्यधिक मोटापे व् वजन के कारण आर्थराइटिस हो जाता है।
  4.  ज्‍यादा शराब पीना, हाई ब्‍लड प्रेशर और पोषण की कमी के कारण भी आर्थराइटिस रोग हो जाता है।
  5. वसायुक्त भोजन अधिक मात्रा में खाने से भी गठिया रोग हो सकता है।
  6.  उच्च रक्त-चाप, मधुमेह, रक्त में बढे कोलेस्ट्रोल की मात्रा के कारण आर्थराइटिस रोग हो जाता है।
  7.  गठिया रोग में हाथ-पांवों में छोटी-छोटी गांठें बन जाती है

आर्थराइटिस (गठिया) का आयुर्वेदिक उपचार:-

पुरानी से पुरानी आर्थराइटिस (गठिया) का अचूक इलाज :- अगर किसी को सालो पुरानी आर्थराइटिस है तो आप इस दवा का सेवन करें इस दवा से पुराने से पुराना आर्थराइटिस एक दम ठीक हो जायेगा|

हारसिंगार से उपाए :- हारसिंगार को अलग अलग नाम से जाना जाता है इसे हिंदी में हारसिंगार, पारिजात व शिउली भी कहते है |इस पेड़ की पहचान ये है की इसके फूल सफ़ेद रंग के होते है और फूल की डंडी नारंगी रंग की होती है, फूल रात में खिलते है और सुबह में झाड़ जाते है इसके फूल की सुगंध बहुत ही मधुर और भीनी होती है| यहाँ आसानी से गांव और शहर में मिल जाते है आपको पेड़ से 8-10 पत्ते तोड़ लें अब इनको मिक्सी  या सिलबाट पर अच्छी तरह से पीस कर इसकी चटनी बना ले |अब पिस्से हुए पत्ते को एक गिलास गरम पानी में उबाले। तब तक उबाले जब तक पानी आधा गिलास न रहे जाये। अब इस काढ़ा को ठंडा होने दे और पेशेंट को सुबह सुबह खली पेट पिलाये । काढ़ा बैठ कर ही पीना है। आपको 2-3 हफ्तों में ही असर दिखना सुरु हो जायेगा।

चुने से उपाए :- चुना में कैल्शियम होता है जो की हड्डी के लिए बहुत ही लाभकारी होता है । गेहूं के दाने के बराबर चुना आपको एक कप दही में मिलाकर खाये अगर आपके पास दही नही तो इसे आप एक कटोरी दाल में मिला कर भी खा सकते है। या फिर एक गिलास ताजा पानी में मिलाकर ले सकते है।  इसका 3-6 महीना सेवन करने से गठिया एकदम ख़त्म हो जायेगा। कृपया पथरी की समस्या वाले पेशेंट इसका सेवन न करे।



मेथी के दाना से उपाए  :आधा चम्मच मेथी के दाने को एक गिलास गरम पानी में दाल कर रात भर के लिए छोड़ दे । सुबह उठ कर पानी को धीरे धीरे पीना है और मेथी का दाना चबाके खाना है। इसका 3महीना सेवन करने से गठिया एकदम ख़त्म हो जायेगा।

 

 

 



इन 3 उपाए में से कोई भी उपाए करे आपको गठिया की बीमारी से बहुत जल्दी ही आराम मिलेगा।

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